Sunday , 26 February 2017
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Song (गीत)

तेरे पास से मै इतना

rachna-

तेरे पास से मै इतना, दूर चली जाऊँगी ! याद करोगे तुम, ख्वाब में भी न आऊँगी !! तेरे पास से मै इतना, दूर चली जाऊँगी ! याद करो गे जब , रो -2 के तुम मुझको ! पुकारो गे आवाज , दे -2 के तुम मुझको !! तेरे पास होगी तनहाई , मै न नजर आऊँगी !! तेरे पास ………………………………….. ! याद करोगे ……………………………….. ! बड़ा तड़फाया मुझे , तेरी बेवफ़ाई ने ! झूठी मोहब्बत की , तेरी कहानी ने !! अब तेरे प्यार की , मै कहानी न ... Read More »

रंग – बिरंगे रंगों वाली

ajmer-ansari

रंग – बिरंगे रंगों वाली ! होली आई होली आई ! नफ़रत की दीवार गिरेगी ! सब के मन की प्यास बुझेगी ! प्रेम का रस पग-पग बरसाती ! होली आई होली आई ! तुम रंगों में भीग गई हो ! औरभी प्यारी मुझको लगी हो ! आओ गले लग जाओ भौजी ! होली आई होली आई ! भर पिचकारी तुमको धरेँगे ! प्रेम के रंग में तुमको रंगेगे ! आओ हम खेलें जीजा जी ! होली आई होली आई ! थाम लो आ के मेरी बहियां ! कह के ... Read More »

अब उठने की बात करो

tukaraam

गिरने की सीमायें टूटीं, अब उठने की बात करो| वर्तमान की सोच सँवारों, स्नेहसिक्त बरसात करो|| बुरा-भला कहने से अच्छी, बात नहीं बन सकती है, दूषित दृष्टि और होती वो, जो पर तन धन तकती है| बिगड़ रहा परिवेश सुधारो, सहजीवन हालात करो| गिरने की सीमायें टूटीं, अब उठने की बात करो| वर्तमान की सोच सँवारों, स्नेहसिक्त बरसात करो|| जाति-वर्ग की सकरी गालियाँ, पग न खुले धरने देंगी, धर्म -मजहबी कलुष कथायें. प्रगति नहीं करने देंगी| लोकतन्त्र की वाणी बोलो, बन्द घात-प्रतिघात करो| गिरने की सीमायें टूटीं, अब उठने की ... Read More »

फर्ज अपना यूँ निभाना आ गया

umasankar

फर्ज अपना यूँ निभाना आ गया । राष्ट्रहित में सर कटाना आ गया ।। हर तमस का चीरकर सीना हमें, दीप आँधी में जलाना आ गया । भूलकर संत्रास-कुण्ठा की व्यथा, जिन्दगी में मुस्कराना आ गया । लूट – हिंसा – अपहरण के दौर में, शान्ति का परचम उठाना आ गया । झूँठ के साम्राज्य का होगा पतन, सत्य का दर्पण दिखाना आ गया । नेह सरिता के सलिल से सींचकर, फूल मरुथल में उगाना आ गया । छल कपट मद लोभ के वटवृक्ष को, काटकर जड़ से मिटाना आ ... Read More »

विश्व ज्योति यीशु के जन्मोत्सव पर

merry-christmas

पूर्व दिशा में जगमग करते, तारे ने संकेत किया है| परमेश्वर ने बैतलहम में, मुक्तिप्रदाता भेज दिया है|| गौशाले में विश्वविधाता, चरनी में लेटा है दाता, बिछुड़ा हुआ प्राथमिक रिश्ता, पुनः जोड़ने आया त्राता| दीन मलीन अधीन जनों के, हेतु यीशु ने जन्म लिया है| परमेश्वर ने बैतलहम में, मुक्तिप्रदाता भेज दिया है|| सत्यमार्ग जीवन का दाता, पावन प्रेम-पराग लुटाता, त्याग समर्पण सेवा व्रत से, हमें शांति संदेश सुनाता| स्वर्ग छोड़कर यीशु विश्व के, पतितों दलितों हेतु जिया हैं| परमेश्वर ने बैतलहम में, मुक्तिप्रदाता भेज दिया है|| स्नेह सहित सद्धर्म ... Read More »

चांदनी फिर पिघलने लगी है

sulabh

चांदनी फिर पिघलने लगी है आँसुओं से धुली वो इबारत गीत बनकर मचलने लगी है। रोते-रोते हुए पस्त शिशु से, भावना के विहग सो गये थे सांझ की डाल सहमी हुई थी, भोर के पुष्प चुप हो गये थे फिर अचानक हुई कोई हलचल, जैसे लहरा गया कोई आंचल उनके दिल से उठी एक बदली मेरी छत पे टहलने लगी है। इक गजल पर तरह दी किसी ने, भूला मुखड़ा पुनः गुनगुनाया प्यार से साज की धूल झाड़ी, मुद्दतों बाद फिर से उठाया तार छेड़ें अभी या न छेड़ें, सुर ... Read More »

आप भी तो खूब हैं गांधी

devendra-arya

आप भी तो खूब हैं गांधी संघियों के बीच संघी, लीगियों के बीच लीगी हम कहाँ जाएँ बताओ जो न संघी हैं न लीगी. आप भी तो खूब हैं गांधी.. बूझते थे दर्द देशी पूंजीपतियों के दिलों का और कबाड़ा कर रहे थे मैनचेस्टर की मिलों का देश से परदेश से आवेश से खुद से लड़े थे था कोई जितना बड़ा तुम उस से दो अंगुल बड़े थे बांध के आधी लंगोटी. तुमने की हिंसा अहिंसा नाम लेकर हर कदम पर नफरतों के आलिमों पर ,धर्म के पटवारियों पर देश ... Read More »

अंतस की वेदना

karan-dc

अंतस की वेदना का गीत लिखने चला हुँ आज। हुँ खुश मैं या उदास यह बताने चला हुँ आज।। कहीं से वक्त दी थी मुझे आवाज, करूँ मैं भी मधुर रिश्तों का आगाज। बढ़ाया था कदम मैनें भी खुशी खुशी उस ओर, होगा क्या इसका जरा भी नहीं था अंदाज।। उन रिश्तों की मधुरता दिखाने चला हुँ आज…. हुँ खुश या………………………………. जिंदगी की राह पर मैं चल रहा था, रंगीनियों से दूर हमेशा ही रहा था। इक मोड़ पर सुनी मधुर सी आवाज, लगा कि कोई मुझे दिल से पुकार ... Read More »

सच्चाई की कमी दिख रही, राजनीति की गलियों में

tukaraam

सच्चाई की कमी दिख रही, राजनीति की गलियों में| किस शुचिता की खोज रही, ठगुओं में भुजबलियों में? भूखे- प्यासे बेवश लाखों, विपदाओं के मारे हैं, शिक्षा- दीक्षा के नारे तो, आसमान के तारे हैं| गरल छिड़कने लगे दरिन्दे, वन उपवन की कलियों में| किस शुचिता की खोज रही, ठगुओं में भुजबलियों में? काली करतूतों को ढँकते, कितने वस्त्र निराले हैं, जितने उज्ज्वल तन से दिखते, उतने मन के काले हैं| अन्तर नहीं परखना चाहें, छलियों में मखमलियों में| किस शुचिता की खोज रही, ठगुओं में भुजबलियों में? पाले- पोषे ... Read More »

भूल के भी मत करना तू

sufi-raina

भूल के भी मत करना तू वर्ना फैसला लिख देंगे हम तेरी तकदीर का, भूल के भी मत करना तू जिक्र कश्मीर का। भूल के भी मत करना तू चारो दिशाओं में अपनी छाप छोड़ता है, भारतीयों की रगों में कश्मीर दौड़ता है, कश्मीर तो अभिन्न अंग भारत के शरीर का। भूल के भी मत करना तू सबकुछ सामने हमने कुछ न छुपाया है, कश्मीर भारत का ताज सरमाया है, इक इक लफ्ज कहता लिखी तहरीर का। भूल के भी मत करना तू भोले शिव शम्भू का कश्मीर घर है, ... Read More »