Sunday , 22 January 2017
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Doha (दोहा)

जीवन जैसा भी मिला

putu

जीवन जैसा भी मिला, इसे करें स्वीकार। होता हर इंसान का, जीने का अधिकार। जीने का अधिकार, प्रकृति से सबको मिलता। कंटक बीच गुलाब, बाग में सुंदर खिलता। कहता ‘कवि विकलांग’, नहीं विचलित करना मन। देह अगर कमजोर, जिओ खुशी-खुशी जीवन॥ – पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’   Read More »

दर्दनाक बम हादसा

sugam

दर्दनाक बम हादसा हृदय विदारक चीख रूहों में चुभती रही सदमे की तारीख रह रह कर उठती रही इक अंजानी हूक जब जब भी खोले गए यादों के संदूक नाकामी तो बोएगी मायूसी के बीज बेहतर है बांधे रखें साहस के ताबीज़ – महेश कटारे सुगम   Read More »

बोल विषैले बोलते

tukaraam

बोल विषैले बोलते, करते अति उत्पात । छुट भैय्यों को रोकिये, सुधरेंगे हालात ।। साहित्यिक संसार भी, लगता है बाज़ार । कोई इस व्यापार में, आकर करे सुधार ।। किस दल से संबद्ध हैं, जमाखोर धनवान । छिपी नहीं है आप से, उन सबकी पहचान ।। ये विकास की बात ही, लगती है परिहास ।। भूख- प्यास पर हो रहे, नये- नये संत्रास ।। बातें छल से हैं भरी, नैतिक शक्ति विहीन । इनसे हरित न हो सके, बंजर पड़ी ज़मीन ।। नागरिकों के कार्य से, फैलें सब संदेश । सहिष्णु हो सकते नहीं, सारे देश प्रदेश ।। कौन यहाँ ... Read More »

चुनावी दौर के दोहे

tukaraam

मित्र चुनावी दौर है, करिये खूब विचार| क्यों बिहार है चाहता, मानवीय सरकार|| प्रगति विरोधी शक्तियाँ,फैलायें विद्वेष| तब होना ही चाहिये, परिवर्तित परिवेश|| भूखे -प्यासे वर्ग से, जिन्हें न कोई प्यार| उस बाजारू सोच की, मत लाना सरकार|| सम्विधान पर लोग जो, करते रहते चोट| उनके हित में भूल से, कभी न देना वोट|| जो जानें जन वेदना,जिन्हें न्याय स्वीकार| उनके हाथों सौंपना, प्रिय बिहार सरकार|| – तुकाराम वर्मा   Read More »

सातों सुख के सात दोहे

tukaraam

चाटुकारियों की लगी, लम्बी सजी कतार। जाति-धर्म की कुर्सियाँ, बाँट रही सरकार।। इन्सानों से है नहीं, उन्हें रंच भी प्यार। जाति-धर्म की कुर्सियाँ, बाँट रही सरकार।। कैसे भी हो कीजिये, वोटों पर अधिकार। जाति-धर्म की कुर्सियाँ, बाँट रही सरकार।। यही आज का सत्य है, नैतिक शिष्टाचार। जाति-धर्म की कुर्सियाँ, बाँट रही सरकार।। स्वप्न हुये साकार हैं, प्रकृति दत्त उपहार। जाति-धर्म की कुर्सियाँ, बाँट रही सरकार।। राजनीति ने हैं रचे, प्रगतिशील हथियार। जाति-धर्म की कुर्सियाँ, बाँट रही सरकार।। लेना है तो लीजिये, करो न सोच विचार। जाति-धर्म की कुर्सियाँ, बाँट रही ... Read More »

हिंदी में बसते सदा, तुलसी सूर कबीर

putu

हिंदी में बसते सदा, तुलसी सूर कबीर। बसे बिहारीलाल हैं, अरु मीरा की पीर॥1॥ हिंदी भाषा ग्राम्य है, ऐसा व्यर्थ विचार। अतिशय सुंदर सरस है, पढ़े-लिखे संसार॥2॥ राम चरित मानस सरिस, हिंदी में सद्ग्रंथ। जिसके पाठन-पठन से, पाए कई सुपंथ॥3॥ खुसरो की मुकरी करें, हिंदी का श्रृंगार। सरस बहे रसखान से, सतत् भक्ति रसधार॥4॥ हिंदी भारत भाल की, बिंदी है अभिराम। हिंदी से होती सुबह, हिंदीमय है शाम॥5॥ हिंदी अपनी सभ्यता, हिंदी अपना धर्म। हिंदी रीति-रिवाज है, हिंदी हैं शुभ कर्म॥6॥ हिंदी को मैंने पिया, घुट्टी के ही संग। हिंदी ... Read More »

मम्मी मेरी दो बना, रंग-बिरंगा केक

putu

मम्मी मेरी दो बना, रंग-बिरंगा केक। कल मेरा है बर्थ डे, मेरे फ्रेंड अनेक। मेरे फ्रेंड अनेक, राधिका जिनमें होगी। महँगा वाला गिफ्त, मुझे वो लाकर देगी। कह ‘पूतू’ कविराय, कोई भी न रहे कमी। लगे चकाचक ट्रीट, हँसी सुन जसुमति मम्मी॥ किया प्रकृति ने कोप जब, गिरिधर बन हर लीन। रोम-रोम सबका ऋणी, धनी रहे या दीन। धनी रहे या दीन, सभी जन गुण गाते हैं। जो भी पाए कष्ट, शरण में आ जाते हैं। कह ‘पूतू’ कविराय, कृपा सुधा सबको दिया। दे करके मुस्कान, मरते को जिंदा किया॥ ... Read More »

‘वेरी हैपी बर्थडे’, बाबा तुलसीदास

putu

यादगार तिथि सप्तमी, अनुपम सावन मास। ‘वेरी हैपी बर्थडे’, बाबा तुलसीदास॥ रामरसायन से मिटेँ, सदा सभी भव रोग। तुलसी शोधक हैं बड़े,धन्य कहें सब लोग॥ रामचरित मानस सरिस, दूजा और न ग्रंथ। इसको पढ़ने से मिला, कितनो को सद्पंथ॥ राम नाम के भजन से, व्याप्त न हो कलिकाल। पाकरके इस मंत्र, को,’पूतू’ हुआ निहाल॥ चित्रकूट में ही मिले, तुलसी को प्रभु राम। अर्पित करता चरण में, कोटिक सुमन प्रणाम॥ – पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’   Read More »

सती उर्मिला प्रेम का

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सती उर्मिला प्रेम का, है पावन सा नाम! जिस द्वारे पर वो खडी, उस में चारों धाम!! -1 पूरी दुनिया मंच है,हम सब हैं किरदार! अभिनय पूरा हो गया , छूटेगा संसार !! – 2 जीवन भर करते रहे , काया का श्रंगार! अन्तकाल में सोचते , मिथ्या है संसार !! – 3 कोई पूजे राम को, कोई फिर घन श्याम! सबका मालिक एक है,कितने भी हों नाम!!-4 जनम – मरण तो सत्य हैं , कोई टाल न पाय! कर ऐसे कुछ कर्म फिर,मानव तन मिल जाय!! -5 जिस ऑगन ... Read More »

जल बिन जीवन ही नही

siv-char

जल बिन जीवन ही नही, जल जीवन का सार! जल कि महिमा है यही, क्यूँ जाऐ बेकार?-1 सच का जो करता रहा, होकर निडर प्रचार। आज बडा मोहताज है, देखो वो अखबार-2 कब तक हम इनके सहें, रोज पीठ पर वार। युद्धो की परवाह नही, आ जाओ एक बार!-3 मुरली की धुन पर जहाँ, नाच रहे सब ग्वाल! कान्हाँ तेरे देश में, होती गाय हलाल!-4 चंदन पर जैसे रहें, लिपटे लाखों नाग! कुर्सी भी चंदन भई, अब तो मनवा जाग!-5 तिनका तिनका जोडकर , खूब सजा संसार! नफरत मैं क्यूँ ... Read More »