Sunday , 26 February 2017
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Muktak (मुक्तक)

बाहर जितनी सादगी

umasankar

बाहर जितनी सादगी, भीतर उतना काला । बोल मधुर रस घोलते, किन्तु कर्म विष- प्याला । पशुता का दामन लिए, मानवता के हिंसक, प्रेम – अहिंसा मन्त्र की, फेर रहे हैं माला ।(1) घृणा – द्वेष की हर तरफ, भड़क रही चिनगारी । किंकर्तव्यविमूढ – सी, दिखती जनता सारी । सम्बन्धों में आपसी,जंग छिड़ी है जब -जब, दुश्मन ने है देश को, लूटा बारी – बारी ।(2) आज अराजकतत्व कुछ, लेकर दहशत- दंगा । देशद्रोह का देखिए, नाच कर रहे नंगा । राष्ट्रप्रेम की भावना, और सभ्यता भूले , मटमैली ... Read More »

जीवन

putu

शाम हुई समझो बेकार। लुप्त हुआ है इससे प्यार। हाथ अनेकोँ छूते रोज, जीवन जैसे है अखबार॥ पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’   Read More »

साधा ऐसा मौन क्यों

putu

साधा ऐसा मौन क्यों, समझ न आए बात। घायल होती भावना, घुटते हैं जज्बात। घुटते हैं जज्बात, पीर तो बढ़ती जाए। कैसा आया वक्त, उदासी चहुँदिश छाए। कह ‘पूतू’ कविराय, अनेकोँ दिखतीं बाधा। कैसा है बदलाव, मौन जो तुमने साधा॥ – पीयूष कुमार द्विवेदी ‘पूतू’   Read More »

जबसे अपनी यारी हो गयी

amit-khare

जबसे अपनी यारी हो गयी गाते हुए फकीर से मुस्कानों की सुलह हो गयी गहरी गहरी पीर से दौलत शौहरत मान प्रतिष्ठा भूख के मारे क्या जानें ये सब हासिल हो पाते है विकते हुए जमीर से जिनके माथे तमगे सजते क्या सचमुच हकदार है सम्मानों की दौङ में आगे कितने चाटुकार है बदनामी से भी बदतर अब सम्मानों का हाल हुआ आज पुरस्कृत हो जाने में डरता इज्जतदार है सम्मानों की हाट लगी है सत्ता के बाजारों से उनको क्या लेना देना है भूखों से लाचारों से पुरस्कार पाने ... Read More »

मेरी हस्ती को ना रौंद अपनी अना से ऐ जालिम

laxmi-ashraaj

मेरी हस्ती को ना रौंद अपनी अना से ऐ जालिम हम तो वो गुलाब की खुशबू है जिसकी महक टूटने से नही जाती***** **ये तेरी चाहत है या सरगोशी है हवा की क़ि जानलेवा हो जाती है तेरे इश्क़ की खुशबू** **ना कोई खेल ना कोई शर्त और ना हार जीत बस उनकी एक नजर और हमारा सब कुछ दाँव पर** **तुम हमारे दिल में समाये हो तहजीब की तरह और हम अपनी तहजीब भूल जाए ये हमारे संस्कार में नही** – लक्ष्मी अशराज   Read More »

टूट कर डाल से

kavi-kuldeep

टूट कर डाल से, जमीं पे बिखर जाऊंगा तुझको पाने के लिए हद से गुजर जाऊंगा बीच राह पर, जो तू छोड़कर गई मुझको बिन पानी के मछली सा, मैं मर जाऊंगा ! – कुलदीप प्रजापति “विद्यार्थी” कोटा, राजस्थान   Read More »

सारे प्रश्न सरल हो जाते एक तेरे आ जाने से

amit-khare

सारे प्रश्न सरल हो जाते एक तेरे आ जाने से सारी दुनिया घर में होती एक तेरे आ जाने से यकीं नही हो तुम्हैं अगर तो आकर मेरे घर देखो मेरा घर जन्नत होता है एक तेरे आ जाने से कितना सूना पन होता है एक तेरे ना होने से मुश्किल आ जाती जीवन में एक तेरे ना होने से जिस्म भले ही चला करे पर उसमें जान नही होती मेरी सांसें सी रूक जाती एक तेरे ना होने से – अमित खरे सेवढा   Read More »

बयाँ कर दूँ हकीकत तो

aadi-ganesh

बयाँ कर दूँ हकीकत तो वो बुरा मान जायेगा, दिखा दूँ खोल के दिल तो वो पूरा जान जायेगा, मेरे बन्धो-अनुबंधो में बस उसका बसेरा है, ग़र टूटा मेरा दिल तो उसी का मान जायेगा। – आदि-शायर/लेखक   Read More »

पीपल के पत्तो में

aadi-ganesh

पीपल के पत्तो में बबूल की झाङी में, मुफलिसी रोती है इक फटी साङी में, कोशिश कर लो भले तुम कितनी भी, कमल खिलता है कीचङ की बाङी में। – आदि-शायर/लेखक   Read More »