Sunday , 22 January 2017
Live

Thought (विचार)

कौन कहता है नारी है अबला

tanuja

कौन कहता है नारी है अबला एक अबला किसी सबल को दे सकती है जन्म भला यह नारी का साहस है उसने झुकना स्वीकार किया सुख में अनुगामिनी, दुख में कवच बनना अंगीकार किया विधाता कभी अन्याय नहीं करता शक्ति के सारे स्रोत एक जगह नहीं भरता दैहिक शक्ति पुरुष को दे आत्मबल नारी पर वार दिया तन और मन की शक्ति को संतुलित आधार दिया न नारी अबला न पुरुष ही सबल दोनों एक दूजे के संबल एक बिना दूसरा अधूरा दोनों सम हों तभी जग पूरा। – तनूजा ... Read More »

बेटी एक सवाल

alka

“माँ, मैंने कभी तुझसे ये सवाल किया था कि… “माँ! तूने क्यों मुझको कोख में मारा, जन्म देने से पहले मेरा अन्त कर डाला, मां! तुझे तो बेटे की चाह थी, मेरी नहीं, तू बेटे को दुनिया में लाना चाहती थी मुझे नहीं, लेकिन माँ! तूने मेरे सवाल का जवाब कभी दिया ही नहीं, तेरी इस खामोशी का मतलब मैंने कभी समझा ही नहीं, लेकिन मां आज तेरी आंखों में साफ देख सकती हूँ, अपनी बेटी के लिए इन दरिन्दो का खौफ देख सकती हूँ, शायद इसी लिए, तूने मुझे ... Read More »

मेरा अनुभव

rachna-goel

हर रोज की तरह उस रोज भी , उगते सूरज को निहार रही थी ! उस दिन सूरज गगनचुंबी इमारत से , कुछ इस तरह नीचे से ढक गया था , कि छतरी के आकार में दिख रहा था !! ऐसी ईश्वरीय छतरी के विस्तृत साये तले , पृथ्वी का प्राणी मात्र एक ही छतरी के नीचे , पल रहा है, पनप रहा है और अंत समय , छोटे साये से, बड़े साये तले जा रहा है !! ऐसा ही बोध अन्तर्मन के किसी कोने मे, हो रहा था कि ... Read More »

आज का “शब्द” और ज्वलंत प्रश्न — कमर्शियल-सरोगेसी

commercial-surrogacy

भारत सरकार ने “कमर्शियल-सरोगेसी” को अवैध घोषित करने की तैयारी कर ली है ..ये निषेध सिर्फ इस मायने में अमंगल कारी या अनर्थकारी नही होगा कि भारत देश तेज़ी से बढ़ती करोड़ों-डालर की एक नयी इंडस्ट्री से वंचित हो जाने वाला है, बल्कि इस लिये भी कि “भ्रूण की शक्ल में “ एक मानव जीवन अपनी अस्तित्व रक्षा के लिये किसी की कोख पाने से वंचित रह जायेगा. मुद्दा सिर्फ़ व्यवसायिक नहीं इसके मानवीय पहलू को भी नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता. इस आलेख को लिखने का उद्देश्य न ... Read More »

होती हैं मुग्धता में, होती है मूर्खता

arpana

जब भी मैं स्त्रीयों के बिच बैठती हूँ, और उनकी बातें सुनती हूँ तो उनके बिच हो रही बातें और बिचार सुन कर मैं चिंतित होने लग जाती हूँ। आख़िर क्या हैं मध्यमवर्ग की स्त्रीयों की विडम्बना। उनके पास सोचने के लिये कोई विषय ही नहीं, कोई कोण ही नहीं। वो जब भी बातें करती हैं तो ये व्रत आने वाला है उसके लिए साड़ियां लेनी हैं, गहने लेनी हैं। या फिर उसके बेटे ने ये किया उसकी बेटी ऐसा करती हैं। बस यही सब बातें उनके बिच होती रहती ... Read More »

बेटियों को मुखाग्नि का अधिकार क्यूँ नहीं

sanjana-tiwari

सम्पूर्ण भारत को यदि एक वाक्य में समेटा जाये तो उसे परम्पराओं का सम्राट कहना अनुचित नहीं होगा । विभिन्न धर्मों, मौसमो, संस्कृतियों और परम्पराओं से सुसज्जित भारतीय जीवन शैली अपने आप में अनोखी और वंदनीय है । प्रातः काल से शुरू होने वाला स्नान ध्यान रात्रि तक भारत को पुष्पों की महक, दीपको की जगमगाहट और घण्टियों की गूंज से सुशोभित करता रहता है । भारत की यही संस्कृति, ईश्वर में आस्था और प्रेम की पराकाष्ठा संसार से विभिन्न जातियों के लोगों को भारतीय संस्कृति में रम जाने को प्रेरित ... Read More »

आरक्षण का दंश ! गर्त में डूबता देश

swetabh

जाति भारतीय समाज और राजनीति की एक सच्चाई है। हर कोई इससे परिचित है कि हमारा समाज अलग-अलग जातियों में विभाजित है और देश में अनेक ऐसे राजनीतिक दल हैं जो इस विभाजन का लाभ अपनी राजनीति चमकाने के लिए करते हैं। उनकी समस्त रीति-नीति ही जातियों पर आधारित है। चूंकि जातियों की राजनीति करना बहुत सरल है इसलिए यह न केवल फल-फूल रही है, बल्कि सामाजिक विभाजन को गहराने का भी काम कर रही है। विडंबना यह है कि जो दल जातिविहीन समाज की सबसे अधिक बातें करते हैं ... Read More »

इन बलात्कारों पर सन्नाटा क्यों?

vibhansu-dayal

मध्य प्रदेश के इंदौर जिले के पर्यटन स्थल कजलीगढ़ में जो कुछ हुआ उससे समूचे समाज को बौखला जाना चाहिए था, देश के चिंतनशील दिमाग को खदबदा जाना चाहिए था, नारीवाद संगठनों के भीतर तूफान खड़ा हो जाना चाहिए था, जागरूक मीडिया को हतप्रभ कर देने वाले कजलीगढ़ कांड पर बड़ी और व्यापक बहस छेड़नी चाहिए थी और अपराधी मूछों पर ताव देते हुए बचकर न निकल पायें इसके व्यावहारिक रास्ते सुझाने-बनाने के प्रयास करने चाहिए थे; परंतु ऐसा कुछ नहीं हुआ। किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को झकझोर कर रख ... Read More »

सलमान के विरुद्ध एक गवाह का सत्य

salman-khan

मुम्बई से अजय शर्मा की रिपोर्ट मुम्बई – सलमान मामले में रविन्द्र पाटिल एक ऐसा गवाह था जिसने सलमान को गाड़ी चलाते और सोये हुए गरीबो पर गाडी चढ़ाते देखा था। वो एक ऐसा कांस्टेबल था। जिसने कभी अपना बयान नहीं बदला। बेचारे को बयान बदलने के लिए करोडो के लालच दिए गए, पुलिस और नेताओ का बहुत दबाव बनाया गया। नौकरी से हटा दिया गया और बिना किसी कारण जेल में भी रखा गया मगर इस ईमानदार और खुद्दार आदमी ने कभी भी अपना बयान नहीं बदला। बेचारे को अपनी जान ... Read More »

आज का इंसान भौतिक हो गया: नाज़नीन

naajneen

मुंबई ब्योरो: नेपाल में आया भूकम्प खुदा का कहर नहीं है। इंसानों द्वारा किये गए पापों ने ललकार दिया उसके कहर को जिसमें मिट गए कई घरों के चिराग, कई परिवार, पांच लाख जानवरों के साथ किया गया अत्याचार कहीं न कहीं खुद को भी दहला कर रख दिया। इंसानों ने धर्म शान्ति, अखंडता और नेपाल पर अपनी एक सोच बताते हुए बोली की ऊपर वाले ने। इंसान को अच्छे कर्म करने और दुनिया में प्यार से रहने के लिए भेजा है। लेकिन इंसान क्या कर है। मार, काट, अशांति, ... Read More »