Sunday , 26 February 2017
Live

Literature (साहित्य)

  • चींटी

    चींटी

    बचपन मे मुझे परिवार मे सभी से प्यार मिला,लेकिन सबसे ज्यादा मेरे दादा जी से और शायद यही कारण था की मै...

  • battery low

    battery low

    आज दोपहर करीब 2 बजे हमारी दुकान “वाच हाउस” पर करीब एक 50 वर्षीय महिला हमारे दुकान पर आईं...

  • घृणा और अवसाद

    घृणा और अवसाद

    यूरोप के बहुत प्रसिद्ध कलाकार बारतोलोमिओ एस्तेबन मुरिलो की इस इस पेंटिंग के बारे में यदि आप नहीं जान...

  • आवरण

    आवरण

    आवरण कितने गाढ़े, कितने गहरे कई कई परतों के पीछे छिपे चेहरे नकाब ही नकाब बिखरे हुए दुहरे अस्तित्व हर ...

  • रावण

    रावण

    हर वर्ष जलाते है रावण फिर भी जिन्दा है रावण वो तो केवल एक रावण आज कल तो है अनगिनत छदम वेष आज में घूम...

चींटी

Graphic1

बचपन मे मुझे परिवार मे सभी से प्यार मिला,लेकिन सबसे ज्यादा मेरे दादा जी से और शायद यही कारण था की मैं उनके साथ सबसे ज्यादा समय बिताया करता था|उन्हे जब भी मौका मिलता वे हमेशा अपने अनुभव के विशाल खजाने से मुझे कुछ न कुछ सीखाने की कोशिश करते थे |एक बार की बात है उन्होने मुझसे पूछा एक बात बताओ बाबू इस धरती का सबसे बुलंद हौसले वाला प्राणी कौन सा है? मुझे लगा क्योंकि हाथी आकार मे सबसे बड़ा है और उसकी ताकत भी सबसे ज्यादा है ... Read More »

battery low

Graphic1

आज दोपहर करीब 2 बजे हमारी दुकान “वाच हाउस” पर करीब एक 50 वर्षीय महिला हमारे दुकान पर आईं उनकी शिकायत यह थी,उन्होंने करीब 4 साल पहले भारत की एक प्रख्यात कंपनी की एक gents घड़ी खरीदी थी जिसकी कीमत उस समय लगभग 2500 ₹ थी उन्होंने सोचा था की इसे निकट भविष्य में अपने दामाद की जन्मदिन पर गिफ्ट करेंगी,इसलिए उन्होंने उस घड़ी को चालू नहीं करवाया और घड़ी को lock ही रहने दिया(यानि घड़ी का बटन/चाभी खींची रहने दी) उनका सोचना यह था की इससे घड़ी का सेल ... Read More »

घृणा और अवसाद

13230070_1619597028330694_4316883087671462045_n

यूरोप के बहुत प्रसिद्ध कलाकार बारतोलोमिओ एस्तेबन मुरिलो की इस इस पेंटिंग के बारे में यदि आप नहीं जानते हैं और मैं आपको बताऊं कि यह एक बाप और बेटी को दर्शाता चित्र है, तो हो सकता है आपका मन घृणा और अवसाद से भर जाये। लेकिन मुझे पूरा यकीन है जब आप इस प्रसिद्ध पेटिंग के पीछे छिपी कहानी को सुनेंगे तो आपके विचार जरूर बदलेंगे – एक बूढ़े आदमी को मरने तक भूखा रहने की सजा दी गई। उसकी एक बेटी थी जिसने अपने सजायाफ्ता पिता से दैनिक ... Read More »

आवरण

tanuja

आवरण कितने गाढ़े, कितने गहरे कई कई परतों के पीछे छिपे चेहरे नकाब ही नकाब बिखरे हुए दुहरे अस्तित्व हर तरफ छितरे हुए कहीं हंसी दुख की रेखायें छिपाए है तो कभी अट्टहास करुण क्रन्दन दबाए है विनय की आड़ लिये धूर्तता क्षमा का आभास देती भीरुता कुछ पर्दे वक़्त की हवा ने उड़ा दिये और न देखने लायक चेहरे दिखा दिये आडम्बर को नकेल कस पाने का हुनर मुश्किल बहुत है मगर कुछ चेहरों में फिर भी बेधड़क नग्न रहने का साहस है बिना कोई ओट ढूंढे सच कहने ... Read More »

रावण

rawan

हर वर्ष जलाते है रावण फिर भी जिन्दा है रावण वो तो केवल एक रावण आज कल तो है अनगिनत छदम वेष आज में घूमता है जन-जन का त्रास करता है नई सुरक्षित है आधुनिक सीता भाती नहीं है रावण को गीता उपदेश उसको देना है बेकार समझाना है उसको तिरस्कार नहीं आज सीते के पास कोई हैं सुरक्षित अभेदी लक्ष्मण रेखा आज जरूरत नहीं रावण को कोई छदम वेष रखने की वो तो दम्भ भर करता है हरण चलती फिरती सीता का न ही भय उसको लोक लज्जा का ... Read More »

क्या रावण का कोई अन्त नहीं….??

nand-kishore

प्रकाण्ड विद्घान, तेजश्वी, स्वर्ग से धरती तक सीढ़ियों का निर्माणकर्ता, इन्द्र, अग्नि देव, वरुणदेव, पवनदेव जैसे अनेक देवताओं को अपने वश में करने बाला दशानन रावण, जो अपने भविष्य को जानता था ! वह जानता था कि उसका उद्घार मर्यादा पुरोषत्तम भगवान श्री राम करेंगे ! हाँ, वही रावण, जिसका वध करने के पश्चात प्रभु श्री रामचन्द्र जी भी उसके सामने आदरपूर्वक नतमस्तक हुए थे ! कहते हैं कि आज दशहरे के दिन बुराई पर अच्छाई की जीत होगी ! क्या, वाकई ये सच है? हम सभी बड़े हर्षोल्लास के ... Read More »

दशहरा का पर्व एवं उसकी समसामयिकता

madhu-trivedi

दशहरा या दसेरा शब्द ‘दश’ (दस) एवं ‘अहन्‌‌’ से बना है विजयदशमीया आयुध पूजा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्यौहार है इस पर्व को भगवती के ‘विजया’ नाम पर ‘विजयादशमी’ कहते हैं। इस दिन रामचंद्रजी चौदह वर्ष का वनवास भोगकर तथा रावण का वध कर अयोध्या पहुँचे थे। इसलिए भी इस पर्व को ‘विजयादशमी’ कहा जाता है। आश्विन शुक्ल दशमी को तारा उदय होने के समय ‘विजय’ नामक मुहूर्त होता है। यह काल सर्वकार्य सिद्धिदायक होता है। इसलिए भी इसे विजयादशमी कहते हैं। दशहरा उत्सव की उत्पत्ति इसी दिन लोग नया ... Read More »

एक दिन अकेले

laxmi-ashraaj

एक दिन अकेले अचानक मुझे कुछ याद आया। मैं क्या थी, क्या हूँ इसके निर्णय का सुरूर छाया मैं दिए की रौशनी हूँ या हूँ अँधेरे की काली छाया एक दिन अकेले………….. जब मैंने शुरू किया खुद को खोजना तो मैंने स्वयं को जाना, और पहचाना कि मैं हूँ एक ‘नारी’ जिसके जीवन का नाम है लाचारी जिसे मारते है लोग कोख में और खुद को कहते है देवी का पुजारी यही है कड़वी सच्चाई और यही है सदियों से चलते आया एक दिन अकेले………….. लेकिन अब मैंने तय कर ... Read More »

मुक्तक

anupam-jee

लक्ष्य खुद पास, आता नहीं दोस्तो | पुष्प खुद पथ, सजाता नहीं दोस्तो | जिंदगी का सफर है, सुहाना मगर, साथ में कोई’ जाता नहीं दोस्तो | ————————————————- बन के गौरव सदन बढ़ रहीं बेटियाँ | ज्ञान धन में मगन पढ़ रहीं बेटियाँ | पंख के बल..बिहंगो ने अंबर छुआ, पंख के बिन गगन चढ़ रहीं बेटियाँ | ———————————————— नाव की तर्ज पर चल रही जिंदगी | चांद की तर्ज पर ढ़ल रही जिंदगी | हो जो ‘ मांझी अगर साथ विश्वास का, बीच खुशियों के ‘ फिर पल रही ... Read More »

नेता की नक्कासी

siyasat

अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेताजी बोलो एक शब्द काफी है, चौराहों पर पूरी पोल ना खोलो खादी कुर्ता और पायजामा, मफलर, टोपी, सब कहती है प्रजातन्त्र में जनता, नेता जी को शदियों से सहती है फिर चुनाव आने वाले हैं, जाओ जोकर के संग डोलो अगर किसी को गाली देनी हो तो बस, नेताजी बोलो सडक छाप पर मुहर लगाकर सभी नमूने चूने तूने बोट माॅगने घर – घर जाकर ये झुनझूने चूने तूने जिसका कोई ठौर ठिकाना काम, धाम पैगाम नही था शहर, गाॅव के ... Read More »