Sunday , 26 February 2017
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Ghazal (ग़ज़ल)

भले न थे फलदार दरख़्त

pradeep-kant

भले न थे फलदार दरख़्त हम थे छायादार दरख़्त कॉन्क्रीट के जंगल में चल ढूंढें दो चार दरख़्त फल इस पर आने को हैं ज़द में सबकी यार दरख़्त आप कुल्हाड़ी ले आए कटने को तैयार दरख़्त ज़हर धुएँ का पीते हैं साँसों का आधार दरख़्त – प्रदीप कान्त   Read More »

कभी जंगे मुहब्बत भी लड़ी जाये तो अच्छा है

sugam

हमारे सामने ऐसी घड़ी आये तो अच्छा है कभी जंगे मुहब्बत भी लड़ी जाये तो अच्छा है भले कुरआन, गीता,ग्रन्थ साहिब भी पढ़े जाएँ इबादत में मुहब्बत भी पढ़ी जाये तो अच्छा है बदन पर अम्न के बख्तर करों में प्यार की ढालें दिलों से पुष्प बाणों की झड़ी आये तो अच्छा है मिटाना है तो कातिल की तिज़ारत को मिटायें हम ज़माने से मुई नफरत चली जाये तो अच्छा है हिफाज़त ज़िन्दगी की हो सुगम बेहद ज़रूरी है क़यामत वक्त से पहले नहीं आये तो अच्छा है – सुगम ... Read More »

ऐसे हाल में कैसे जिया जाये

sugam

ज़माने में मेरा पैगाम ये पहुंचा दिया जाये मुहब्बत का हूँ पैमाना मुझे जी भर पिया जाये उसूले ज़िन्दगी हूँ इस ज़माने में नहीं चलता किताबों में फ़क़त लिख लिख के मुझको रख लिया जाये मैं आईना हूँ सच कहना मेरी फितरत में शामिल है मेरी फितरत बुरी तो है मगर अब क्या किया जाये मुहब्बत हूँ मगर नफरत के आगे हार जाता हूँ ज़रूरी है मुझे दिल में सज़ा कर रख लिया जाये फलक हूँ दूर तक फैला हुआ रोशन सितारों का मेरी ख्वाहिश है मुझको मुट्ठियों में भर ... Read More »

डराने के लिए डरना पड़ेगा

asfaq

तजर्बा बर तरफ करना पड़ेगा ! डराने के लिए डरना पड़ेगा !! मुहब्बत इक पुरानी पेंटिंग है ! कलर पर फिर कलर करना पड़ेगा !! तुझे तो ऐन्ड तक जीना है लेकिन ! मुझे इस सीन में मरना पड़ेगा !! तुम्हारी आँख में इक झील है ना ! इसी के बाद इक झरना पड़ेगा !! दिए मुँह ज़ोर होते जा रहे हैं ! हवा से राब्ता करना पड़ेगा !! – अशफ़ाक़ रशीद   Read More »

सर्जना की साधना में लीन हूँ

sugam

सर्जना की साधना में लीन हूँ मत बोलिये आजकल तबियत से मैं रंगीन हूँ मत बोलिये उड़ रहा हूँ मैं हवा के साथ सारे व्योम में प्यार हूँ मैं त्याग की तौहीन हूँ मत बोलिये मैं मुहब्बत के सफर पर चल पड़ा हूँ दोस्तों बस उसी की याद में तल्लीन हूँ मत बोलिये प्रेम में सब कुछ लुटाने का अहद जो है मेरा मैं उसी के आज भी आधीन हूँ मत बोलिये मैं खड़ा हूँ आज भी अपने नए अवतार में पर यकीनन मैं बहुत प्राचीन हूँ मत बोलिये प्यार ... Read More »

जीवे सें मन कितै भरत है

sugam

दिन ऊंगत है रोज़ ढरत है साल जात का देर लगत है सुख के दिना अगर होवें तौ सालन कौ नईं पतौ चलत है दुःख कौ समऔ कठन है भैया बज्जुर बैरी जान परत है हंस कें झेलौ सुख तकलीफें जीवन में सब लगौ रहत है माया मोह होत है ऐसौ जीवे सें मन कितै भरत है सुख हम भोगें दुःख को सैहै बात सुगम खूबई समझत है – सुगम   Read More »

न जाने क्यों?

alka

न जाने क्यों दोस्त बनाकर, भुला देते हैं लोग, यूँ ही बेवजह, हमारा दिल दुखा देते हैं लोग.. दोस्त बना लेना तो, आसान है उनके लिए, मगर दोस्ती के रिश्ते, कहां निभा पाते हैं लोग.. हम तो दोस्तों को, अपने दिल मे जगह देते हैं, हमारा दिल दुखाकर भी, मुस्कुरा देते हैं लोग.. दोस्तों का हाथ थामते हैं हम, बड़ी शिद्दत से मगर, हमारा हाथ छुड़ाकर, पराया बना देते हैं लोग.. जिन्दगी भर साथ निभाने का,वादा तो करते हैं लेकिन, जिन्दगी को ही, एक याद बना देते हैं लोग.. हम ... Read More »

जो रक्खा था जोड़जाड़कर

sugam

जो रक्खा था जोड़जाड़कर दिया उसे बेमन निकालकर रक्खे थे साडी की तह में नोट नए कब से संभालकर हवा नहीं लगने दी जिनको खुद हाथों से दिए काढ़कर रूपये दे दिए एक्सचेंज को कुर्चा के सब ढूढ़ ढांढकर बच्चों की प्यारी सी गुल्लक रख दी हमने फाडफाडकर ज़रा गृहणियों से तो पूछो सुगम कलेजा दिया फाड़कर   – सुगम   Read More »

तुम क्या जानो पीर पराई रहने दो

note-ban

तुम क्या जानो पीर पराई रहने दो बातें हैं सब हवा हवाई रहने दो लगा दिया लाइन में बिन सोचे समझे अब देते फिर रहे सफाई रहने दो उस रस्ते पर चलने की ज़िद करते हो जिसके बीच कुंआ और खाई रहने दो बीमारी वो बाँट रहे हो दुनिया को जिसकी कोई नहीं दवाई रहने दो शर्म आ रही तुम्हें आदमी कहने में तुम ठहरे बेदर्द कसाई रहने दो – सुगम   Read More »

तू बता यहाँ पे ईमानदार कौन है

sarmsaar

अपनी हरकतों पे अब शर्मसार कौन है।। तू बता यहाँ पे ईमानदार कौन है।। फसलों की जगह ज़मी से उगी हैं नफरतें। जाने इन दरख्तों का आबयार कौन है।। अक्ल मंद तू समझदार मैं भी हूँ बहुत। देखें चल के अब कहीं शीर खार कौन है।। मैं अमीर होने के वहम में जिया मगर। आगे आगे चल रहा चौबदार कौन है।। दर्द जिसने भी दिया मैने दी दुआ उसे। बेवकूफ हूँ मैं गर होशियार कौन है।। पै-ब-पै ओ हर्फ-दर-हर्फ पढ़ता हूँ तुझे। अब भी उम्मी हूँ तो फिर होनहार कौन ... Read More »