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आज दोपहर करीब 2 बजे हमारी दुकान “वाच हाउस” पर करीब एक 50 वर्षीय महिला हमारे दुकान पर आईं उनकी शिकायत यह थी,उन्होंने करीब 4 साल पहले भारत की एक प्रख्यात कंपनी की एक gents घड़ी खरीदी थी जिसकी कीमत उस समय लगभग 2500 ₹ थी उन्होंने सोचा था की इसे निकट भविष्य में अपने दामाद की जन्मदिन पर गिफ्ट करेंगी,इसलिए उन्होंने उस घड़ी को चालू नहीं करवाया और घड़ी को lock ही रहने दिया(यानि घड़ी का बटन/चाभी खींची रहने दी) उनका सोचना यह था की इससे घड़ी का सेल खर्च नहीं होगा उनकी सोच अच्छी थी पर उनकी अपेक्षा नहीं,जब इस घड़ी को उन्होने अपनी बेटी को दिया ताकि वह उनके दामाद को दे सके ,घड़ी को देखने पर उनकी बेटी ने उन्हे बताया की वह(दामाद) इस घड़ी को पहनेंगे नहीं क्योंकि उनके दामाद के पास पहले ही उससे मिलती- जुलती घड़ी थी |इसलिए उन्होंने सोचा की इस घड़ी को भविष्य में उचित समय पर किसी और को गिफ्ट करेंगी।1 साल बीता,2 साल,फिर 3 साल और फिर 4 साल आखिरकार उनके पास एक उपयुक्त मौका आ ही गया जब वह यह घड़ी अपने बहन के परिवार की शादी में गिफ्ट कर सकती थी।इसलिए उन्होंने घड़ी को निकाला और उसे चालू करने की कोशिश की,पर घड़ी नहीं चली, नाराजगी और घड़ी न चलने की समस्या के साथ वो हमारे दुकान पर आईं,उन्होंने हमे यह पूरा घटनाक्रम बताया की किस उद्देश्य से वह घड़ी ले गई थीं और क्या कारण थे की वह 4 साल से यह घड़ी इस्तेमाल नहीं हुई,उसके बाद उन्होंने हमे घड़ी चेक करने को दी।
हमने इस घड़ी को अपने कारीगर को दिया,घड़ी की बैटरी लीक कर गई थी और लीक करने के कारण घड़ी के अन्य पुर्जो की स्थिति भी चिंताजनक नज़र आ रही थी,घड़ी की स्तिथि के बारे में हमने उन्हें अवगत कराया,प्रतिक्रिया स्वरुप उन्होंने हमसे पुछा की “ऐसा कैसे हो सकता है? सेल खर्च न हो इसीलिए तो मैंने सेल को इतने दिनों तक लॉक रखा था।उन्हें अपेक्षा रखने का अधिकार था पर जो वास्तविकता थी हमने उन्हें बताया और नए सेल और काफी कोशिशो के बाद उनकी घड़ी चल गई।
महिला अब खुश थीं इसलिए नहीं की घड़ी चल गई बल्कि इसलिए की आखिरकार 4 साल बाद अब वह घड़ी गिफ्ट करने जा रहीं थी।

प्रकृति का एक system/नियम जो मुझे बहुत अच्छा लगता है,उस system के अनुसार सभी चीजो की एक सीमित अवधि है,सभी चीजो को ख़त्म होना है,यदि शुभारंभ है तो उसका अंत भी है,भले ही हम उसे कितना भी सहेज के रखें या उसकी सुरक्षा के लिए कितने भी प्रयास करें।चाहे यह पेड़ हो,इंसान हो या जानवर यह नियम सभी पर एक बराबर लागू होता है।
जैसे महिला ने यह सोच कर की सेल न खर्च हो इसलिए घड़ी को चालू नहीं किया और रखे-रखे ही बिना इस्तेमाल किये हुए ही घड़ी का सेल खराब हो गया।ऐसे ही मनुष्य जाति के अधिकांश लोग अपनी योग्यता का इस्तेमाल किये बिना ही इस धरती से चले जाते हैं वो सही अवसर आने का सिर्फ इंतज़ार करते ही रह जाते है,इंतज़ार तो ख़त्म नहीं होता पर ज़िन्दगी ख़त्म हो जाती है।
इन लोगो द्वारा इसके लिए अधिक या कम उम्र,पैसे का अभाव,अधूरी शिक्षा,उपयुक्त अवसरो का न मिलने इत्यादि जैसे अनेक कारण बनाए जा सकते हैं|पर मुझे लगता है की एक साधारण मनुष्य को जितना भी प्रभु ने दिया है यदि वह उसका बेहतर इस्तेमाल करे तो वह निश्चय ही असाधारण बन जाएगा|और यह दुनिया ऐसे महान लोगो के उदाहरणो से भरी पड़ी है बस हमें उनसे प्रेरणा लेने और आगे बढ्ने की ज़रूरत है|

अपनी योग्यता को पहचाने और उसका इस्तेमाल करें वो भी बिना इंतज़ार किये।

 

राजल………………………….

(लेखक स्वतंत्र स्तंभकार व् “राजलनीति “के लेखक हैं  )

 

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