चींटी

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बचपन मे मुझे परिवार मे सभी से प्यार मिला,लेकिन सबसे ज्यादा मेरे दादा जी से और शायद यही कारण था की मैं उनके साथ सबसे ज्यादा समय बिताया करता था|उन्हे जब भी मौका मिलता वे हमेशा अपने अनुभव के विशाल खजाने से मुझे कुछ न कुछ सीखाने की कोशिश करते थे |एक बार की बात है उन्होने मुझसे पूछा एक बात बताओ बाबू इस धरती का सबसे बुलंद हौसले वाला प्राणी कौन सा है? मुझे लगा क्योंकि हाथी आकार मे सबसे बड़ा है और उसकी ताकत भी सबसे ज्यादा है इसलिए मैंने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ उन्हे बताया की “हाथी,सबसे ताकतवर और सबसे बड़ा इसलिए सबसे बुलंद हौसले वाला भी”
मेरे इस उत्तर को सुनने के बाद उन्होने मुसकुराते हुए “नही” मे सिर हिलाया और उन्होने मुझे उत्तर के रूप मे एक शब्द बोला जो की उस सवाल का सही जवाब भी था|पर यह उत्तर सुनकर मुझे लगा की वह मुझसे मज़ाक कर रहे हैं |इसलिए मैंने उनसे पूछा ऐसा कैसे हो सकता,यह हो ही नहीं सकता|
उन्होने मुझसे जो एक शब्द कहा था और वह इस प्रश्न का सही उत्तर भी था इस धरती पर सबसे बुलंद हौसले वाले प्राणी का नाम है “चींटी”
मेरे दादाजी ने जो इसके पीछे तर्क दिया वह यह था:
# अगर चींटी के सामने कोई समान/समस्या रखी जाए तो वह या तो उसके दाएँ से निकलने की कोशिश करेगी,या बाएँ से,या ऊपर से या नीचे से वह कुछ(सदैव कोशिश) भी करती रहेगी और तब तक करती रहेगी जब तक वह सफल न हो जाए या मर न जाए
# चींटी भविष्य की प्लानिंग पहले से करती है यानि की जाड़े की तैयारी वह पहले से ही कर लेती है और इसकी शुरुआत वह गर्मी के समय से ही करना शुरू कर देती है ताकि विपरीत समय आने पर वह ठीक से रह सके
# वह अपनी क्षमता से ज्यादा करने की कोशिश करती है हम देखते है की चींटी कभी-कभी अपने आकार और अपने वज़न से ज्यादा का समान उठाने की कोशिश करती है (जबकि ज़्यादातर इंसान अपनी क्षमता का 10 % भी इस्तेमाल नहीं करता)\
# चींटी अपने समूह के साथ मिल करके एक उद्देश्य के साथ काम करती है जैसे भोजन की खोज करना और उसे इकट्ठा करना |

मेरे दादा जी बिलकुल सही थे और मैं बिलकुल गलत,प्रभु का बनाया हुआ इतना छोटा सा प्राणी और इतना बुलंद हौसला,यदि कोई भी इस प्राणी से इसके ये गुण सीख ले तो वह कहाँ से कहाँ पहुँच जाएगा|
मुझे बहुत अफसोस होता है की मेरे दादा जी अब नहीं हैं पर अगर वे होते तो मुझे जरूर मुझे बताते की क्या मेरा हौसला भी इस चींटी की तरह बुलंद हुआ या नहीं?

राजल………………………….

(लेखक स्वतंत्र स्तंभकार व् “राजलनीति “के लेखक हैं  )

 

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