लोग मिलते हैं दिल जलानेको

लोग मिलते हैं दिल जलानेको ।
मन में चिंगारियां जगाने को
क्या पता है कि उनकी हरकत से ।
दर्द ही शेष अब दिखाने को ।

जख्म फिर से कुरेद डाला है ।
दिल को क़दमों से मसल डाला है ।
बुझते अरमां को हवा दे दे कर ।
मेरे गुलशन को कुचल डाला है।

शर्त रखी है कठिन जीने की
वेदना में भी मुस्कुराने को ।
ज्योति सा जलने को विवश हूँ मै
मोम से रिश्तों को पिघलाने को ।

दर्द बोया है सुख की चाहत में ।
हूँ मै तनहा या कोई राहत में ।
खोखली दस्तकों से ऊब चला ।
कहाँ मजा किसी बगावत में ।

अब ख्यालों में फिर नहीं आना ।
आर्द्र मेघों सा फिर नहीं छाना ।
धूप की तरह प्रखर हो जाऊं ।
शीत पुरवाई बन नहीं आना ।

अब जो आये हो फिर नहीं जाना
अब जो आये हो …….नहीं जाना

yougendra

योगेन्द्र पाठक
जिला विकास अधिकारी
आगरा ।

 

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