Sunday , 22 January 2017
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नया दौर

इस नये दौर में इंसान का जामी होना !
बाइसे – फ़ख्र है दुनियाँ में अवामी होना !

तुमको मालुम नहीं दोस्तों इस दौर में भी !
जान ले लेता है सच्चाई का हामी होना !

चाँद में भी तो कोई दाग़ नज़र आता है !
क्या नई बात है इंसान में ख़ामी होना !

हुस्न-ए-इख़लाक़ से क़िरदार सजाओ यारो !
कोई आ जाये तो लाज़िम है सलामी होना !

नेकियाँ यूँ भी कमाते हैं मौहब्बत वाले !
फ़ख्र की बात समझते हैं पयामी होना !

हम गुनाहगारों पे इस तरह वो ढाता है क़हर !
ज़लज़ले आना कहीं और सुनामी होना !

ए”कशिश”उनके घरों का भी निज़ाम उलटा है !
जो बड़ी बात समझते हैं निज़ामी होना !

ajmer-ansari

अजमेर अंसारी “कशिश”

 

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