Sunday , 26 February 2017
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दुश्मन के हवाले तुमने

ज़ुबाँ पै जड़ दिए कानून के ताले तुमने
मुल्क को कर दिया दुश्मन के हवाले तुमने

तीरगी बुन रही बेचेंनियों के सन्नाटे
रास्ते कौन से आखिर ये निकाले तुमने

कौन से मुंह से तरक्की की बात करते हो
मुंह से मज़लूम के छीने हैं निबाले तुमने

हुए जो हश्र बताते हैं कहानी सारी
कौन से मोर्चे शिद्दत से संभाले तुमने

रात तो रात ”सुगम” दिन भी हो गए काले
किसी को कौन से बख्शे हैं उजाले तुमने

sugam

– सुगम

 

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