कर्मों से जितना काला है

कर्मों से जितना काला है
वो उतना किस्मत वाला है

खुली छूट हो गयी झूठ को
पर सच के मुंह पर ताला है

अपराधों से जिसका रिश्ता
उसको फूलों की माला है

मेहनत की हो गयी फ़ज़ीहत
निकला उसका दीवाला है

नफरत की है बहिन सियासत
लूट पाट की ये खाला है

दल जागीरें परिवारों की
चचा, भाई जीजा, साला है

sugam

– सुगम

 

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