Wednesday, 29 March, 2017

उसकी गर ज़ात कुछ नहीं होती

yousufउसकी गर ज़ात कुछ नहीं होती
फिर करामात कुछ नहीं होती !!

कुछ न कुछ बात होगी पोशीदा
बात बेबात कुछ नहीं होती !!

सिर्फ़ इक नूर का ही जलवा है
चाँदनी रात कुछ नहीं होती !!

भूल जाता मैं दुश्मनी शायद
जो खुराफ़ात कुछ नहीं होती !!

जो उगलता है ज़हर बातों में
उसकी औक़ात कुछ नहीं होती !!

हाथ मिल जाये और दिल न मिले
वो मुलाकात कुछ नहीं होती !!

– यूसुफ़ रईस

 

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