तू बता यहाँ पे ईमानदार कौन है

sarmsaarअपनी हरकतों पे अब शर्मसार कौन है।।
तू बता यहाँ पे ईमानदार कौन है।।

फसलों की जगह ज़मी से उगी हैं नफरतें।
जाने इन दरख्तों का आबयार कौन है।।

अक्ल मंद तू समझदार मैं भी हूँ बहुत।
देखें चल के अब कहीं शीर खार कौन है।।

मैं अमीर होने के वहम में जिया मगर।
आगे आगे चल रहा चौबदार कौन है।।

दर्द जिसने भी दिया मैने दी दुआ उसे।
बेवकूफ हूँ मैं गर होशियार कौन है।।

पै-ब-पै ओ हर्फ-दर-हर्फ पढ़ता हूँ तुझे।
अब भी उम्मी हूँ तो फिर होनहार कौन है।।

इक हवा चली है ऐसी बिखर गया हूँ “चाँद”
बिखरा हूँ अगर मैं, तो बरकरार कौन है।।

chand

– मुहम्मद “चाँद”

 

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