Sunday , 26 February 2017
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न जाने क्यों?

न जाने क्यों दोस्त बनाकर, भुला देते हैं लोग,
यूँ ही बेवजह, हमारा दिल दुखा देते हैं लोग..

दोस्त बना लेना तो, आसान है उनके लिए,
मगर दोस्ती के रिश्ते, कहां निभा पाते हैं लोग..

हम तो दोस्तों को, अपने दिल मे जगह देते हैं,
हमारा दिल दुखाकर भी, मुस्कुरा देते हैं लोग..

दोस्तों का हाथ थामते हैं हम, बड़ी शिद्दत से मगर,
हमारा हाथ छुड़ाकर, पराया बना देते हैं लोग..

जिन्दगी भर साथ निभाने का,वादा तो करते हैं लेकिन,
जिन्दगी को ही, एक याद बना देते हैं लोग..

हम बहुत आंसू बहाते हैं, दोस्ती को याद करके,
पर न जाने क्यों दोस्त बनाकर, भुला देते हैं लोग..

बेवजह ही हमारा दिल दुखाते हैं बहुत,
और दिल दुखाकर भी मुस्कुरा देते हैं लोग…

alka

– अलका श्रीवास्तव

 

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