ऐसे हाल में कैसे जिया जाये

sugamज़माने में मेरा पैगाम ये पहुंचा दिया जाये
मुहब्बत का हूँ पैमाना मुझे जी भर पिया जाये

उसूले ज़िन्दगी हूँ इस ज़माने में नहीं चलता
किताबों में फ़क़त लिख लिख के मुझको रख लिया जाये

मैं आईना हूँ सच कहना मेरी फितरत में शामिल है
मेरी फितरत बुरी तो है मगर अब क्या किया जाये

मुहब्बत हूँ मगर नफरत के आगे हार जाता हूँ
ज़रूरी है मुझे दिल में सज़ा कर रख लिया जाये

फलक हूँ दूर तक फैला हुआ रोशन सितारों का
मेरी ख्वाहिश है मुझको मुट्ठियों में भर लिया जाये

न हो जब पेट भर रोटी ,न छत ,कपड़ा ,हवा ,पानी
सुगम मुश्किल है ऐसे हाल में कैसे जिया जाये

– सुगम

 

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