दिल्‍ली विधानसभा में ‘राइट ऑफ सिटीजन टू टाइम बाउंड डिलीवरी ऑफ सर्विसेज’ सर्वसम्मति से पारित, निर्धारित समय के भीतर करना होगा काम

नई दिल्ली: दिल्‍ली विधानसभा में पेश राइट ऑफ सिटीजन टू टाइम बाउंड डिलीवरी ऑफ सर्विसेज (नागरिकों का सेवाओं की समयबद्ध आपूर्ति) संशोधन अधिनियम, 2017 सर्वसम्मति से पारित हो गया। अब इसे उपराज्यपाल के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। जल्‍द ही यह कानून का रूप ले लेगा। इसमें कई विभागों को जवाबदेह बनाया गया है। ऐसा होने से विभाग काम में हीलाहवाली नहीं कर सकेंगे और न लोगों का एक काम के लिए दफ्तरों का चक्‍कर लगाना होगा।

इस अहम संशोधन विधेयक को मंजूरी मिलने के बाद दिल्ली वालों को कई सेवाओं के लिए सरकार की मंजूरी लेना ज्यादा आसान हो जाएगा। ये कानून कई सेवाओं जैसे, बिल्डिंग प्लान, पानी और बिजली कनेक्शन या कोई सर्टिफिकेट जारी करने के लिए संबंधित विभागों के सामने एक समयसीमा रखेगा, जिसके तहत उन्हें निर्धारित दिनों के भीतर मंजूरी देनी होगी।

अगर विभाग समयसीमा से पहले काम पूरा नहीं करता है, तो संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई हो सकती है। विधेयक में लिखा हुआ है कि अधिनियम की अधिसूचना के 30 दिनों के भीतर, हर विभाग, स्थानीय निकाय और सार्वजनिक प्राधिकरण सिटीजन चार्टर जारी करेगा। इस चार्टर में हर विभाग ये निर्धारित करेगा कि कौन सी सेवा इस एक्ट के तहत आएगी।

हालांकि, निर्धारित समय के भीतर अपने दायित्व को पूरा न करने पर कितना जुर्माना लगेगा, ये तय नहीं हुआ है। पहले ये जुर्माना 10 रुपये प्रतिदिन था (अधिकतम 200 रुपये) लेकिन अब इसके बढऩे की उम्मीद है, ताकि अधिकारियों पर काम जल्दी पूरा करने का दबाव बनाया जा सके।

2011 में बने इस एक्ट में संशोधन के बाद एक बड़ा बदलाव आएगा, जो नागरिकों के लिए बड़ी राहत होगा। एक्ट में पहले ये नियम था कि विभाग से पेनल्टी लेने के सूरत में नागरिक को खुद सरकार से गुहार लगानी होगी लेकिन नया नियम यह सुनिश्चित करेगा कि अधिकारी की खुद ये जिम्मेदारी होगी कि वो पेनल्टी अदा करे।

 

 

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